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बिहार
तुम/ ज़िंदगी
तुम/ ज़िंदगी
Jasraj Bishnoi
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Thursday, January 09, 2025
मेरा हर मौसम तुम हो,
मेरे हर किस्से में तुम हो,
मेरी गुजरे और आने वाले हर लम्हों में तुम हो,
मेरे हर ढालते शाम की कहानी और सुबह की कविता में तुम हो,
मेरे हाथों की लकीरों में एक उम्मीद बन के तुम हो,
"तुम, हाँ तुम, तुम वो हो, जो मुझमे जीती हो"
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