रात हुई लोग फोन में डूब गए, अब छत से कौन देखता है तारे। भोर में सोए दोपहर में जगे, सुबह का सूरज कौन निहारे। हर दर्द कैद है घरों के आंगन में, अब कौन बैठता है दरिया किनारे। सभी अपने ही खड़े हैं जीवन युद्ध में, अब किससे जीतें किससे हारें? नई पीढ़ी है नएपन में व्यस्त रहती है, अब बुजुर्गों के साथ कौन वक्त गुजारे। ये पैसे, ये गहने, ये मकान, सब किसलिए? चले जाना है जब सबको हाथ पसारे।
अभी अभी तो मिले हो, जरा ठहर कर निकलना, कमजोर हैं दिल के दरवाजे, संभलकर निकलना, चंद लम्हों में मेरी मोहब्बत कैसे समझोगे? कभी मेरे साथ किसी सफर पर निकलना। मिट जायेंगे हमारे दर्मियां जो भी फासले होंगे, मोहब्बत की बारिश होगी, सिर्फ हम, तुम और रास्ते होंगे। चलते चलते शाम होगी फिर तेरा इशारा होगा, इश्क के दो पंछी होंगे कितना हसीन नजारा होगा? मैं डूबा रहूं तुझमें उम्रभर यही मेरी ख्वाहिश होगी तू ही मेरा दरिया होगा तू ही मेरा किनारा होगा। निकाल फेकूंगा तेरे दिल से चुभे जो गमों के क…
शुक्रिया जिंदगी , शुक्रिया जिंदगी, कैसे करूं मैं तेरा, शुक्रिया जिंदगी। जन्म लिया और जिंदा हूं, उसपर भारत का बाशिंदा हूं, मिला मां का प्यार, सिर पर पिता का हाथ भी है, दोस्त भी अजीज मिले, और खुदा का साथ भी है, क्या हुआ कुछ पल, इम्तिहान लिया तुमने, फिर गम में मुस्कुराने का, हुनर दिया तुमने, जीना सीखा तुझको तो, जमाने से हुई दिल्लगी, शुक्रिया जिंदगी, शुक्रिया जिंदगी, कैसे करूं मैं तेरा, शुक्रिया जिंदगी।।
तूफानों में भी पंक्षियों का हौसला देख, बचा ही लेती हैं शाखों पर घोंसला देख। मिलेगी तुझे भी मंजिल यकीनन, क्यूं घबराता है तू फासला देख? गिर, संभल, जब चलना सीख ले जमीं पर, अपना सिर उठा फिर आसमां देख। तपना पड़ता है मेहनत की आग में, सॅंवरती नही किसी की तकदीर ऐसे, थक कर बैठ गए फिर कैसे? उठो, चलो, क्यूं मन मार रहे हो? जब जीत सकते हो तो क्यूं हार रहे हो? चीरकर विपरीत धाराएं भी बाहर निकल सकते हो तुम, हे छोटे! अपना वक्त …
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