आओ फिर एक बार राष्ट्र का निर्माण करें जिसमें कोई रंग , रूप का भेद ना हो जिसमें किसी जाति , धर्म का राज ना हो जहां न्याय व्यवस्था हो , ऐसी लगे सबको आसान आओ फिर एक बार राष्ट्र का निर्माण करें .....!! "वसुदेव कुटुंबकम" को फिर से एक बार परिभाषित करें आज खो रही इंसानियत को पुनः सभी इंसानों में फिर से जीवित करें गांव हो या शहर आओ सभी जगह का विकास करें भोजन, शिक्षा, रोजगार मिले सभी को कुछ ऐसा काम करें आओ फिर एक बार राष्ट्र का निर्माण करें .....!! हर जगह, हर बेटी रहे सुरक्षित एक ऐसा समाज बनाएं सभी मिलकर बन जाएं "हम "…
अपने दिल के हर जज्बात , शब्दों में बया करती हूं ऐ साहिब , मेरी यादों में , तेरे ही शब्दों के जादू हैं..... मेरे अल्फ़ाज़ तेरे दिल तक , पहुंचाने की ही बात हैं दुआ हैं उस खुदा से कि, मेरी कविता तुझे पसंद आ जाएं.... लिख कर कागज पर, अपने हर ख्वाब को तेरे इश्क के जादू ने मुझे, आसमा तक पहुंचाया हैं! शब्दों के सागर में, मैं तैर रही हूं तुम्हारी यादों की कश्ती में, तेरे प्रेम की इक लहर लहराई है.....!!
राहों में मिले भले हजार ठोकरे फिर भी लगातार आगे बढ़ते रहना तुम अपनी सपनों की उड़ान भरना तुम..... किताबों से अब यारी और रातों से दोस्ती करना तुम अपनी सपनों की उड़ान भरना तुम..... गिर जाओ कभी तो फिर से खड़े होना तुम आगे चलना तुम अपने सपनों की उड़ान भरना तुम..... ख्वाबों को हर रोज़ नया गढ़ना तुम हवाओं और तूफानों से हमेशा लड़ना तुम अपनी सपनों की उड़ान भरना तुम..... अपने मां पिता का सर ऊंचा करना तुम कोई ऐसा काम करना तुम अपनी सपनों की उड़ान भरना तुम.....
कोमल हैं कामजोर नहीं तू, शक्ति हैं महाकाली हैं, खोज कर अपने अस्तित्व की तू, बेवजह इस दुनिया में नहीं आई हैं....!! बहन, बेटी, पत्नी, बनकर, करती समाज का कल्याण तू, तुझसे ही यह खुशहाल संसार बना, तुझसे ही हर घर की नीव खड़ी हैं, अब समय आ गया हैं ,नारीशक्ति का ज्ञान तू करा उठा शस्त्र तू.. !! याद कर उस क्षण को तू बनकर राम कृष्ण की जननी , खुद को गौरवान्वित तूने किया , समाज और देश के खातिर , अपना सब कुछ लूटा दिया, खोज कर अपने अस्तित्व की बेवजह इस दुनिया में नहीं आई हैं....!! सुंदर सृष्टि सृजन कर तूने अपना फर्ज निभाया फिर तू क्यू उदास हैं, बहुत सह लि…
माना सौभाग्य से बेटी जन्म लेती हैं, बेटे दुआओं में मांगे जाते हैं, पर जनाब जितना सोचते हैं लोग लड़का होना आसान नहीं होता हैं। बचपन में पढ़ाई की चिंता तो जवानी में कमाई की चिंता , सताती हैं लेकर सारी जिम्मेदारियां ढोते गधे की भाति हैं। परिवार से दूर रहकर जीते, अनाथों की जैसी जिंदगी। हर बार जिम्मेदारी का , अहसास कराया जाता हैं। हम लड़के हैं जनाब , बार- बार ये बताया जाता हैं। क्या कहें साहेब, लड़का होना भी आसान नहीं होता। हों अगर किसी से प्यार भी, दिल में रखते हैं उसे जब मांगने जाते हाथ उसका , तो ये सुनाया जाता हैं, बन पहले काबिल तू , फिर मां…
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